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7 उपाय , ताकि साइकिल चलाते समय कमर दर्द न हो/7 tips to avoid back pain during/after cycling

साइक्लिंग एक अच्छा व्यायाम है।पर अगर सही तरीके से न किया जाय तो पीठ दर्द सहित कई रोगों को जन्म दे सकता है। यहां पर कुछ उपाय बताए जा रहे हैं जिसको अपनाकर आप कमर दर्द सहित कई रोगों से बच सकते हैं।

साइकिल की सीट खड़े होने पर

सीट की ऊंचाई इलियम हड्डी तक रखें

सीट कड़ी और चौड़ी होनी चाहिए ताकि वह कूल्हों को सहारा दे सके। सीट की ऊंचाई इतना होना चाहिए कि खड़े होने पर सीट की ऊंचाई कूल्हे के बराबर पर हो।

सीट पर बैठ कर देखें

एक बार एड़ी (heel) पैडल पर और एक बार पैर का पंजा पैडल पर रख कर देखें

अपनी एड़ी को पैडल पर रखें। और पैडल को 6o clock स्थिति में लाएं अब आपका पैर सीधा होना चाहिए और आपका घुटना पूरी तरह से बंद होना चाहिए।(यानी पूरी तरह सीधा होना चाहिए) यदि ऐसा नहीं है तो बाइक से उतरें और धीरे-धीरे काठी (सीट)की ऊंचाई बढ़ाएं, इस अभ्यास को तब तक दोहराएं जब तक कि यह पूरा न हो जाए।

जब पैर के पंजे पैडल पर रखें हों तो घुटना करीब 30 डिग्री में मुड़ा होना चाहिए

इस तरह से सीट की ऊंचाई बनाने से आपको hamstring तनाव, सियाटिक नर्व खिंचाव,हिप मसल्स पुल, की समस्या आने की संभावना नगण्य रहती है।

सीट का झुकाव (angle tilt)

Neutral पोजिशन में रखना चाहिए

आगे की ओर झुकी हुई सीट घुटने में दर्द पैदा कर सकती है। और पीछे की ओर झुकी हुई सीट कमर और गर्दन में दर्द पैदा कर सकती है, इसलिए सीट को न्यूट्रल पोजीशन में रखना चाहिए।

साइकिल के हैंडल की ऊंचाई और एंगल क्या रखना चाहिए

पीठ की मांसपेशियों के लचीलेपन के आधार पर, हैंडलबार की ऊंचाई अक्सर काठी(seat) की ऊंचाई के साथ या 4 इंच (10 सेमी) नीचे तक होती है।

नौसिखिए और कभी-कभार साइकिल चलाने वालों को अपने हैंडलबार को अपनी सीट के समान ऊंचाई पर रखना चाहिए।

• अनुभवी साइकिल चालक अधिक वायुगतिकीय(aerodynamic) और तेज़ होने के लिए आमतौर पर अपने हैंडलबार को अपनी काठी (सीट)की ऊंचाई से कुछ इंच नीचे रखते हैं, लेकिन इसके लिए उनकी पीठ की मांसपेशियों के भीतर अच्छे लचीलेपन की आवश्यकता होती है।

पीठ की पोजिशन

अति पहुंच (over reaching)

अति लचीला(over flexed)

यदि आप पीठ दर्द से बचना चाहते हैं तो साइकिल चलाते समय आपका बैठने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। साइकिल चलाते समय अपनी पीठ को सीधा रखने की कोशिश करें

अपनी छाती और सिर को ऊपर रखते हुए अपना कुछ वजन अपनी बाहों और हाथों में बांट लें।मांसपेशियों की थकान को रोकने के लिए समय-समय पर स्थिति बदलें और अपने ऊपरी शरीर के कोण को बदलें।ये कमर दर्द से बचने में भी सहायक होता है।

समय-समय पर अपने सिर को धीरे से उठाना और नीचे करना आपकी गर्दन को ढीला रखने और मांसपेशियों में खिंचाव से बचने में सहायक होता है।

ये सही पोजिशन है
पीठ सीधी ,कोहनी थोड़ा मुड़ी हुई,कुछ वज़न कंधे और हाथ पर

साइकिल चलाने से पहले कुछ खास व्यायाम करें

ब्रिज व्यायाम

साइकिल चलाने से पहले पेट और कमर की मूल(basic) स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए

• इसके साथ पेट और पीठ की मांसपेशियों का समन्वित तरीके से उपयोग करने वाला कोई भी व्यायाम एक अच्छा कोर व्यायाम है।उदाहरण के लिए, एक बड़ी व्यायाम गेंद पर बैठकर अपना संतुलन बनाए रखने की कोशिश करने से आपकी मुख्य मांसपेशियां काम करेंगी।

• ब्रिज एक्सरसाइज करें: अपने घुटनों को मोड़कर और पैरों को फर्श पर सपाट रखते हुए अपनी पीठ के बल लेट जाएं, अपनी रीढ़ को तटस्थ स्थिति में रखें और अपने कूल्हों को झुकाएं नहीं। अपने पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए, अपने कूल्हों को फर्श से ऊपर उठाएं और कम से कम 30 सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें। रोजाना पांच से 10 बार दोहराएं। यह आपके ग्लूट्स(हिप मांसपेशी) को मजबूत करने में भी मदद करेगा।

कुल्हे और टांगों को मजबूत करें

साइकिल चलाना निसंदेह आपके पैरों को मजबूत कर सकता है, लेकिन शोध से पता चला है कि यदि साइकिल चलाने से पहले आपके पैर पर्याप्त मजबूत नहीं हैं, तो आपको पीठ दर्द का अधिक खतरा है। वैज्ञानिकों ने साबित किया है कि जब साइकिल चालक अत्यधिक थका देने की स्थिति तक पेडल करते हैं, तो उनकी हैमस्ट्रिंग (hamstring) और काफ (calf)की मांसपेशियां अधिक थक जाती हैं, जो उनकी रीढ़ की हड्डी को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं और उन्हें पीठ दर्द के खतरे में डालती हैं। इसलिए, साइकिल चलाने को एक शौक के रूप में शुरू करने से पहले अपने पैरों में ताकत बढ़ाने पर विचार जरूर करें।पैरों को मजबूत करने के अलावा कूल्हों को भी मजबूत करने का व्यायाम करना चाहिए।

सलाह:: जिनको पहले से कमर दर्द है,साधारणत: साइकिल चलाना ऐसे मरीजों को मना किया जाता है ताकि उनका दर्द  न बढ़ने पाए। परंतु अगर हल्की समस्या(mild benign backache) वाले लोग  यहां बताए गए उपाय ध्यान रख कर साइकिल चलाएंगे तो वह भी फिट रह सकते हैं। पर ऐसे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह देने के बाद ही यह करना चाहिए।

आपको ब्लॉग पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

Dr. Vivek Swarnkar, an Orthopedic Surgeon with more than 15 years of experience.

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